Karnataka: कर्नाटक के तटीय इलाकों में सदियों से बोली जाने वाली Tulu भाषा को अब राज्य में दूसरी अतिरिक्त आधिकारिक प्रशासनिक भाषा का दर्जा मिलेगा। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की अध्यक्षता में शुक्रवार को Mangaluru में हुई कैबिनेट बैठक में यह फैसला लिया गया। यह पहली बार है जब कर्नाटक कैबिनेट की बैठक Bengaluru के बाहर हुई। फैसला मुख्य रूप से दक्षिण कन्नड़ और उडुपी जिलों में लागू होगा।
दशकों पुरानी मांग हुई पूरी
Tulu लोककथाओं, रंगमंच, धार्मिक परंपराओं और रोजमर्रा की बातचीत का हिस्सा रही है। इसके आधिकारिक दर्जे की मांग कई सरकारों के कार्यकाल में उठती रही। पूर्व मुख्यमंत्री और BJP नेता बीएस येदियुरप्पा ने 2008 में Tulu को आधिकारिक मान्यता देने और संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की सिफारिश का वादा किया था। शुक्रवार का फैसला राज्य स्तर पर Tulu को औपचारिक प्रशासनिक मान्यता देता है।
तटीय क्षेत्र के लिए कई बड़े फैसले
कैबिनेट ने दक्षिण कन्नड़ का नाम बदलकर Mangaluru करने के लिए ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी कर एक महीने तक आपत्तियां और सुझाव मांगने का फैसला किया। इसके अलावा Coastal और Malnad क्षेत्रों के लिए अलग Tourism Policy को मंजूरी दी गई।
Mangaluru के Fisheries College को Fisheries, Marine and Blue Economy University में अपग्रेड करने और सीटें 60 से बढ़ाकर 200 करने का भी निर्णय लिया गया। 2026-31 के लिए Karnataka Marine Biotechnology Policy को भी मंजूरी मिली।
कैबिनेट ने करीब 32,611 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट और प्रस्ताव मंजूर किए। शिवकुमार के मुताबिक इनमें करीब 16,000 करोड़ ग्रामीण विकास और करीब 16,000 करोड़ Mangaluru, Udupi तथा तटीय क्षेत्र के लिए हैं। उन्होंने कहा कि मछुआरों, उद्योगपतियों, व्यापारिक संगठनों, निवासियों और जनप्रतिनिधियों से मिले सुझावों को फैसलों में शामिल किया गया।
Mangaluru क्यों अहम?
Padil स्थित Praja Soudha में हुई बैठक के लिए मंत्री open-top bus से पहुंचे। सरकार ने इसे Bengaluru से बाहर क्षेत्रीय विकास पर ध्यान देने की पहल के रूप में पेश किया। शिवकुमार ने कहा कि इसे “Team Karnataka” की भावना के तहत किया गया है और अगले 15 महीनों में राज्य के 10-12 स्थानों पर कैबिनेट बैठकें आयोजित करने की योजना है।
Dakshina Kannada और Udupi लंबे समय से BJP के मजबूत राजनीतिक क्षेत्र रहे हैं। 2023 के विधानसभा चुनाव में BJP ने Udupi की सभी पांच और Dakshina Kannada की आठ में से छह सीटें जीती थीं। Lok Sabha में भी Dakshina Kannada ने लंबे समय से BJP का समर्थन किया है। ऐसे में Mangaluru में कैबिनेट बैठक और क्षेत्रीय मुद्दों पर फैसलों को राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
Tulu के लिए यह फैसला सिर्फ प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि लंबे समय से चली आ रही भाषाई और सांस्कृतिक पहचान की मांग को औपचारिक मान्यता मिलने का महत्वपूर्ण पड़ाव है।

