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UPI पर MDR को लेकर घमासान, कांग्रेस सांसदों के समर्थन के दावे पर आया विपक्ष का जवाब

by | Sep 17, 2026 | News Big

UPI MDR: UPI पेमेंट पर Merchant Discount Rate (MDR) को लेकर केंद्र सरकार और कांग्रेस के बीच विवाद बढ़ गया है। सरकार का दावा है कि संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति ने UPI के लिए एक स्तरीय MDR या रेवेन्यू मॉडल की सिफारिश की थी। सरकार के मुताबिक, समिति की रिपोर्ट को मंजूरी दिए जाने के दौरान कांग्रेस के पांच सांसद मौजूद थे और किसी ने औपचारिक असहमति दर्ज नहीं कराई। वहीं कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई और मनीष तिवारी ने इस दावे पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि समिति के सामने मौजूदा MDR व्यवस्था का कोई विशिष्ट प्रस्ताव नहीं रखा गया था और दर, शुल्क, अधिकतम सीमा या छूट जैसी शर्तों पर चर्चा नहीं हुई थी।

सरकार ने समिति की रिपोर्ट का दिया हवाला

सरकारी पक्ष की ओर से संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति की 44वीं एक्शन टेकन रिपोर्ट का हवाला दिया गया है। रिपोर्ट में UPI के लिए एक स्तरीय MDR या स्थायी रेवेन्यू मॉडल तैयार करने की जरूरत बताई गई थी। सरकार के मुताबिक, अगस्त में रिपोर्ट अपनाए जाने के समय कांग्रेस के पांच सांसद—पी. चिदंबरम, मनीष तिवारी, गौरव गोगोई, किशोरी लाल और के. गोपीनाथ बैठक में मौजूद थे। प्रकाशित कार्यवाही में इन सांसदों की ओर से औपचारिक असहमति दर्ज नहीं है।

कांग्रेस ने कहा- मौजूदा MDR प्रस्ताव पर चर्चा नहीं हुई

गौरव गोगोई ने सरकार के इस दावे को खारिज किया है। उनका कहना है कि वित्त संबंधी स्थायी समिति के सामने हाल में घोषित किए गए UPI शुल्क का कोई विशेष प्रस्ताव नहीं आया था। गोगोई के मुताबिक, जब वित्तीय सेवा विभाग समिति के सामने आया था, तब UPI पर इस तरह के किसी खास शुल्क का प्रस्ताव मौजूद नहीं था। उन्होंने कहा कि MDR की जरूरत को लेकर सवाल जरूर उठाए गए थे, लेकिन उस समय सरकार की ओर से स्पष्ट जवाब नहीं मिला।

मनीष तिवारी ने भी उठाए सवाल

कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने भी गोगोई के बयान का समर्थन किया है। उनका कहना है कि 15 अक्टूबर से लागू होने वाले MDR के संबंध में समिति के सामने कोई खास प्रस्ताव नहीं रखा गया था। तिवारी के मुताबिक, MDR की दर, शुल्क की रकम, अधिकतम सीमा और किन लेनदेन को छूट मिलेगी—इन बिंदुओं पर समिति में चर्चा नहीं हुई थी। उन्होंने यह भी कहा कि MDR की जरूरत और उपयोगिता को लेकर अलग-अलग बैठकों में सदस्यों ने सवाल उठाए थे।

15 अक्टूबर से लागू होगा नया MDR

नए नियम के तहत 15 अक्टूबर 2026 से 2,000 रुपये से ज्यादा के पात्र Person-to-Merchant UPI लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होगा। यह शुल्क व्यापारी से लिया जाएगा, ग्राहक से नहीं। 75,000 रुपये या उससे अधिक के लेनदेन पर MDR की अधिकतम सीमा 300 रुपये होगी। Person-to-Person यानी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को किए जाने वाले UPI भुगतान इस MDR के दायरे में नहीं होंगे। छोटे कारोबारियों के लिए भी छूट का प्रावधान है।

विवाद की वजह क्या है

मौजूदा विवाद मुख्य रूप से इस सवाल पर है कि संसदीय समिति की ओर से MDR के लिए व्यापक रेवेन्यू मॉडल की सिफारिश और अब लागू किए जा रहे खास MDR ढांचे को किस तरह देखा जाए। सरकार प्रकाशित समिति रिकॉर्ड में औपचारिक असहमति दर्ज नहीं होने का हवाला दे रही है, जबकि कांग्रेस सांसदों का कहना है कि समिति के सामने मौजूदा MDR प्रस्ताव की दर, रकम और छूट जैसी विशिष्ट शर्तें नहीं रखी गई थीं।

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