UPI MDR Supreme Court: केंद्र सरकार की ओर से 15 अक्टूबर से UPI मर्चेंट पेमेंट को लेकर नया नियम लागू किया जाना है। इसके तहत 2,000 रुपये से अधिक के UPI मर्चेंट पेमेंट पर 0.4% मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाया जाना प्रस्तावित है। इस फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से MDR को लेकर कई सवाल पूछे। कोर्ट ने जानना चाहा कि इस चार्ज से आखिर कमाई किसे होगी और यह रकम फीस है या टैक्स। हालांकि, कोर्ट ने फिलहाल इस व्यवस्था पर रोक नहीं लगाई है और सरकार से चार सप्ताह में स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।
SC ने सरकार और RBI से मांगी MDR की पूरी जानकारी
सुप्रीम कोर्ट ने सरकार और RBI से UPI MDR की पूरी जानकारी यानी इसके कानूनी आधार से लेकर इससे होने वाली कमाई तक का विवरण मांगा है। कोर्ट ने पूछा कि 2,000 रुपये से अधिक के UPI पेमेंट पर लगने वाले इस चार्ज से किसे फायदा होगा और इसमें कोई टैक्स देने वाली संस्था शामिल है या नहीं।
कोर्ट ने यह भी सवाल किया कि MDR कोई अलग सेवा शुल्क है या इसे टैक्स माना जाएगा। साथ ही सरकार और RBI से इसका कानूनी आधार बताने को कहा गया। कोर्ट ने यह सवाल भी उठाया कि अगर एक टैक्सपेयर से दूसरे टैक्सपेयर के बीच कैश पेमेंट होता है, तो ऐसे में इसका कानूनी स्वरूप क्या होगा।
RBI ने SC के सामने क्या कहा?
सुनवाई के दौरान RBI की ओर से पेश वकील ने कहा कि इनकम टैक्स एक्ट के तहत यह एक वैध ट्रांजैक्शन है। उनके मुताबिक MDR ऐसा चार्ज नहीं है जिसे केंद्र सरकार वसूलती है। यह रकम UPI पेमेंट सर्विस देने वाले पेमेंट एग्रीगेटर्स और बैंकों द्वारा ली जाती है। RBI की ओर से दलील दी गई कि ये संस्थाएं कैश ट्रांजैक्शन के बजाय तत्काल डिजिटल ट्रांजैक्शन सुनिश्चित करने के लिए सिस्टम उपलब्ध कराती हैं और MDR उनकी सेवा के लिए लिया जाने वाला शुल्क है। RBI ने कहा कि यह पूरी तरह एक प्रशासनिक व्यवस्था है और इससे सरकार को कोई कमाई नहीं होती।
वित्त मंत्री ने भी दी थी सफाई
UPI MDR से जुड़ा नोटिफिकेशन NPCI की ओर से जारी होने के बाद विपक्ष ने सरकार पर सवाल उठाए थे। इसके बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी पिछले सप्ताह इस मामले पर सफाई दी थी।
वित्त मंत्री ने कहा था कि 2,000 रुपये से कम के UPI लेनदेन पर MDR लागू नहीं होगा। उन्होंने स्पष्ट किया था कि UPI MDR न तो टैक्स है और न सेस। यह रकम भारत के Consolidated Fund में जमा नहीं होगी, बल्कि सर्विस प्रोवाइडर्स द्वारा सिस्टम को बेहतर बनाने और बेहतर सेवाएं देने के लिए ली जाएगी। उन्होंने यह भी कहा था कि इसका बोझ उपभोक्ताओं पर नहीं डाला जाएगा और यह ऑपरेटर्स के बीच का चार्ज होगा।
कहां कितना लगेगा UPI MDR?
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत 2,000 रुपये से अधिक के पेमेंट पर 0.4% MDR तय किया गया है, लेकिन सभी तरह के लेनदेन पर एक समान शुल्क नहीं होगा। फ्लैट-रेट मॉडल की श्रेणी में आने वाले UPI पेमेंट, जिसमें पेट्रोल पंप के लेनदेन भी शामिल हैं, पर 5 रुपये का फिक्स्ड MDR निर्धारित किया गया है। वहीं, 1 लाख रुपये तक का पेमेंट करने वाले व्यापारियों को राहत दी गई है और उन्हें Zero MDR वाली श्रेणी में रखा गया है।
ये भी पढ़े: सूरत में चोरी करने घुसे दो युवक कारखाने में फंसे, खिड़की से लगाई ‘बचाओ-बचाओ’ की गुहार

