Uttarakhand Glacier Retreat: उत्तराखंड के भारतीय मध्य हिमालय में ग्लेशियर तेजी से पीछे हट रहे हैं। UPES देहरादून और वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी के शोधकर्ताओं की समीक्षा 15 सितंबर 2026 को Discover Geoscience में प्रकाशित हुई। इसमें 1990–2024 की रिसर्च, फील्ड सर्वे, सैटेलाइट इमेजरी और DEM डेटा को शामिल किया गया। 23 प्रमुख ग्लेशियरों का कुल संचयी रिट्रीट 25,621.01 मीटर दर्ज हुआ। औसत रिट्रीट रेट एक हिस्से में 23.23 मीटर/वर्ष, जबकि समरी टेबल में arithmetic mean 24.63 मीटर/वर्ष है।
Khatling सबसे तेज पीछे हटने वालों में
टिहरी का Khatling Glacier 1965–2014 में 88 मीटर/वर्ष की दर से करीब 4.34 किमी पीछे हटा और छोटे हिस्सों में बंट गया। Pindari में 2000–2018 के दौरान 45.8, Milam में 1972–2018 में 37.8, Gangotri में 1935–2004 में करीब 22, Chorabari में 6.8 और Bhagirathi में 3.7 मीटर/वर्ष की दर दर्ज हुई। Satopanth के लिए Table 2 में 1962–2020 की दर 6.5 मीटर/वर्ष है।
सिर्फ तापमान नहीं, कई कारक जिम्मेदार
समीक्षा के अनुसार रिट्रीट केवल तापमान पर निर्भर नहीं है। बर्फ पर जमा चट्टानी मलबा insulation की तरह काम कर पिघलाव धीमा करता है। ऊंचाई, ढलान, आकार और दिशा भी असर डालते हैं। दक्षिणमुखी ग्लेशियरों में करीब 18% shrinkage का उल्लेख है। Lake-terminating ग्लेशियरों की औसत रिट्रीट दर 34.9 मीटर/वर्ष, जबकि land-terminating की 22.5 मीटर/वर्ष रही।
Milam में 2004–2014 के बीच करीब 480 मीटर रिट्रीट और लगभग 47 glacial lakes बनने की सूचना है। यह किसी खास गांव के लिए quantified GLOF risk का आकलन नहीं है।
Upper Alaknanda में भी कमी
वैज्ञानिक मनीष मेहता के अनुसार Upper Alaknanda Basin में 1994–2020 के बीच glacierized area 4.2±2.9% घटा। Snout retreat 9.3 से बढ़कर 13.3 मीटर/वर्ष हुआ और snowline करीब 100 मीटर ऊपर गई। 0.5 वर्ग किमी से छोटे ग्लेशियरों में 15% तक क्षेत्रफल घटा। समीक्षा के अनुसार 2000 के बाद कई ग्लेशियरों में retreat और ELA rise की गति बढ़ी, हालांकि अलग-अलग ग्लेशियरों की प्रतिक्रिया अलग रही।
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