Vande Bharat Chair Car: वंदे भारत ट्रेन के नए चेयर कार रेक ने हाई-स्पीड ट्रायल में 180 किमी प्रति घंटे की रफ्तार पकड़कर अहम पड़ाव पार किया है। यह परीक्षण पश्चिम मध्य रेलवे के नागदा-कोटा-सवाई माधोपुर रेलखंड पर किया गया, जहां नए रेक की तेज गति पर क्षमता और प्रदर्शन को परखा गया। 180 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रायल सफल रहने के बाद अब ट्रेन को अंतिम प्रमाणन से पहले कुछ और जरूरी परीक्षणों से गुजरना होगा।
फाइनल स्पीड सर्टिफिकेशन से पहले कई टेस्ट बाकी
यह परीक्षणों की उस श्रृंखला का हिस्सा है, जिसे रिसर्च डिजाइन एंड स्टैंडर्ड्स ऑर्गनाइजेशन (RDSO) रेक को अंतिम गति प्रमाणन देने से पहले कर रहा है। 180 किमी प्रति घंटे की रफ्तार पर लोडेड ऑसिलेशन ट्रायल सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है। हालांकि, रेक के परीक्षण कार्यक्रम को पूरी तरह पूरा करने और फाइनल स्पीड सर्टिफिकेशन हासिल करने से पहले अभी कई महत्वपूर्ण परीक्षण किए जाने बाकी हैं।
फाइनल टेस्ट में ब्रेकिंग और कपलर की जांच
हाई-स्पीड परीक्षण में खाली रेक का ऑसिलेशन, कपलर फोर्स और इमरजेंसी ब्रेकिंग ट्रायल किया जाएगा। कपलर फोर्स टेस्ट में तेज रफ्तार और ब्रेकिंग के दौरान कोचों के बीच दबाव-खींचाव की जांच होगी। वहीं, 160 किमी प्रति घंटे तक की रफ्तार पर इमरजेंसी ब्रेक लगाकर ब्रेकिंग क्षमता और ट्रेन के रुकने की दूरी मापी जाएगी।
टेस्ट के आंकड़ों की होगी तकनीकी जांच
परीक्षणों के दौरान रिकॉर्ड किए गए आंकड़ों का विश्लेषण RDSO के टेस्टिंग डायरेक्टोरेट की ओर से किया जाएगा। रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, सभी निर्धारित परीक्षण पूरे होने के बाद उनके नतीजों की तकनीकी मानकों पर जांच होगी। रेक के सभी परीक्षण संतोषजनक पाए जाने के बाद ही उसे अंतिम स्पीड सर्टिफिकेट जारी किया जाएगा।

