Vehicle Loan Recovery: अगर आपने कार, ट्रक या कोई दूसरा वाहन लोन पर लिया है और किसी वजह से उसकी ईएमआई नहीं चुका पा रहे हैं, तो बैंक या फाइनेंस कंपनी आपके वाहन की रिकवरी कर सकती है। हालांकि, इसके लिए मनमाना या जबरन तरीका अपनाने की इजाजत नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले में वाहन जब्ती की प्रक्रिया को लेकर अहम टिप्पणी की है। मामला एक टाटा एसएफसी 407 ट्रक का है, जिसे हरि दत्ता शर्मा ने कमर्शियल व्हीकल लोन के जरिए खरीदा था। वाहन को चोलामंडलम इन्वेस्टमेंट एंड फाइनेंस कंपनी ने फाइनेंस किया था। लोन की किस्तों में डिफॉल्ट के बाद कंपनी ने अप्रैल 2023 में ट्रक अपने कब्जे में ले लिया।
आधी रात ट्रक ले जाने का आरोप
हरि दत्ता शर्मा का आरोप था कि 9 अप्रैल 2023 की रात करीब 1 बजे कुछ लोग उनके पास पहुंचे। उन्होंने ट्रक का स्टीयरिंग लॉक तोड़ा और वाहन लेकर चले गए। उनका कहना था कि इस कार्रवाई से पहले उन्हें जरूरी नोटिस भी नहीं दिया गया था। ट्रक ले जाने के बाद उन्होंने उसी दिन लॉस्ट आर्टिकल रिपोर्ट और ई-एफआईआर दर्ज कराई। बाद में फाइनेंस कंपनी ने ट्रक को 31 अगस्त 2023 को 4.5 लाख रुपये में बेच दिया। कंपनी ने बिक्री के बावजूद करीब 5.71 लाख रुपये की रकम बकाया होने का दावा किया।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या आदेश दिया
जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने मामले की सुनवाई की। कोर्ट ने चोलामंडलम फाइनेंस कंपनी को 4.5 लाख रुपये 6 प्रतिशत सालाना ब्याज के साथ वापस करने का निर्देश दिया। इसके अलावा कंपनी को हरि दत्ता शर्मा को 10 लाख रुपये मुआवजा और 50 हजार रुपये मुकदमे के खर्च के तौर पर देने का आदेश दिया गया।
क्या बैंक वाहन जब्त नहीं कर सकता
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का मतलब यह नहीं है कि ईएमआई डिफॉल्ट होने पर बैंक या फाइनेंस कंपनी वाहन को कब्जे में नहीं ले सकती। लोन एग्रीमेंट में कुछ परिस्थितियों में वाहन वापस लेने की शर्त हो सकती है। लेकिन इस अधिकार का इस्तेमाल कानून और उचित प्रक्रिया के मुताबिक होना जरूरी है। यानी वाहन जब्त करने का अधिकार होने का मतलब यह नहीं है कि रिकवरी एजेंट किसी भी समय, किसी भी तरीके से गाड़ी उठा सकते हैं।
कोर्ट ने लोन एग्रीमेंट की शर्तों पर भी गौर किया। इसमें वाहन पर कब्जा लेने से पहले सात दिन के नोटिस का प्रावधान था। अदालत ने इस तरह की शर्तों को निष्पक्ष और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर परखा। सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि सेल्फ-हेल्प रिपजेशन यानी अदालत की लंबी प्रक्रिया के बिना कुछ परिस्थितियों में वाहन वापस लेने की व्यवस्था अपने आप में गलत नहीं है। लेकिन इसका इस्तेमाल बल, धमकी या चोरी-छिपे तरीके से नहीं किया जा सकता।
आरबीआई की गाइडलाइंस का भी जिक्र
फैसले में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की रिकवरी से जुड़ी गाइडलाइंस और निर्देशों का भी उल्लेख किया गया। इनमें रिकवरी एजेंटों के व्यवहार को लेकर नियम बनाए गए हैं। कोर्ट ने कहा कि कर्ज की वसूली कानून के मुताबिक और उचित तरीके से होनी चाहिए। उधारकर्ता को डराने, धमकाने या परेशान करने वाले तरीकों का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने फैसले की एक प्रति आरबीआई को भेजने का निर्देश भी दिया।
ईएमआई नहीं भर पा रहे हैं तो क्या करें
अगर वाहन की ईएमआई भरने में परेशानी हो रही है, तो बैंक या फाइनेंस कंपनी से लिखित रूप में संपर्क करना बेहतर है। बकाया रकम, नोटिस और भुगतान की समयसीमा से जुड़े दस्तावेज सुरक्षित रखें। अगर वाहन जब्त करने की कार्रवाई की जाती है, तो यह देखना जरूरी है कि फाइनेंस कंपनी ने लोन एग्रीमेंट और लागू नियमों के मुताबिक प्रक्रिया अपनाई है या नहीं।
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