China J-36 Fighter Jet: चीन अपने पश्चिमी रेगिस्तान में मौजूद एक बड़े फ्लाइट-टेस्ट सेंटर का तेजी से विस्तार कर रहा है। सैटेलाइट तस्वीरों में नए हैंगर, टैक्सीवे और अन्य ढांचे नजर आने के बाद इसे चीन की अगली पीढ़ी के सैन्य विमानों की तैयारी से जोड़कर देखा जा रहा है। यह गतिविधि ऐसे समय सामने आई है, जब चीन और अमेरिका के बीच हवाई ताकत को लेकर प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है।
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट (SCMP) की रिपोर्ट के मुताबिक, शिनजियांग के लोप नूर इलाके में स्थित इस सुविधा में चार बड़े हैंगर, नए टैक्सीवे और एक गोलाकार प्लेटफॉर्म दिखाई दिए हैं। माना जा रहा है कि इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल इंजन की जांच या विमानों को घुमाने के लिए किया जा सकता है। तस्वीरों में ईंधन भंडारण से जुड़े बड़े ढांचे भी नजर आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इस साइट का विस्तार अगस्त 2025 के आसपास शुरू हुआ था। इसके बाद यहां बिना पिछले हिस्से यानी टेल वाला एक विमान भी देखा गया, जिसे व्यापक तौर पर चीन के J-36 से जोड़ा जाता है। इसे छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान के विकास से संबंधित माना जा रहा है। हालांकि, विमान का आधिकारिक नाम और इस सुविधा में चल रहे सभी कार्यक्रमों की पुष्टि सार्वजनिक रूप से नहीं हुई है।
अमेरिकी नौसेना के सेवानिवृत्त खुफिया अधिकारी और मिशेल इंस्टीट्यूट के वरिष्ठ फेलो जे. माइकल डाहम के मुताबिक, फरवरी 2026 तक इस सुविधा में लगभग 5,570 वर्ग मीटर अतिरिक्त हैंगर क्षेत्र जुड़ चुका था। इसके अलावा 3 लाख वर्ग फुट से अधिक अन्य बुनियादी ढांचे का निर्माण भी हुआ। डाहम के अनुसार, नए निर्माण में विमानों की जांच के साथ कर्मचारियों के रहने की व्यवस्था भी शामिल हो सकती है। इससे संकेत मिलता है कि चीन इस केंद्र को एक साथ कई विमान कार्यक्रमों पर काम करने के लिए तैयार कर रहा है।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अगस्त 2025 में टेललेस विमान देखे जाने के करीब 17 दिन बाद एक और नई पीढ़ी का विमान इस क्षेत्र में नजर आया था। इसे आम तौर पर J-XDS या J-50 जैसे नामों से जोड़ा जाता है। हालांकि, इन नामों को लेकर भी आधिकारिक पुष्टि नहीं है। लोप नूर में पहले से करीब 5 किलोमीटर लंबा रनवे मौजूद है। इस रनवे की जानकारी वर्ष 2020 में सामने आई थी और तब इसे चीन के दोबारा इस्तेमाल किए जा सकने वाले अंतरिक्ष यान कार्यक्रम से जोड़ा गया था।
लोप नूर का सबसे बड़ा फायदा इसकी भौगोलिक स्थिति है। शिनजियांग का यह इलाका विशाल और कम आबादी वाला है। ऐसे में चीन संवेदनशील विमानों की टेस्टिंग बड़े शहरों और आम लोगों की नजर से दूर कर सकता है। बड़े हैंगर और अतिरिक्त बुनियादी ढांचे से यहां एक साथ कई विमान परियोजनाओं पर काम करने की संभावना बढ़ती है। इससे चीन के अन्य फ्लाइट-टेस्ट सेंटरों पर दबाव कम हो सकता है और नई तकनीकों की जांच का काम तेज हो सकता है।
लोप नूर में हो रहा विस्तार चीन की सैन्य विमानन क्षमता बढ़ाने की कोशिशों का संकेत देता है। हालांकि, यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि इस सुविधा का इस्तेमाल किस-किस विमान के लिए हो रहा है। फिर भी, J-36 जैसे संभावित छठी पीढ़ी के विमानों के संदर्भ में यह गतिविधि चीन और अमेरिका के बीच बढ़ती एयर-पावर प्रतिस्पर्धा को जरूर रेखांकित करती है।
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