El Nino Record 2026: प्रशांत महासागर में अल-नीनो ने नया रिकॉर्ड बनाया है. निनो 3.4 क्षेत्र में समुद्र की सतह का औसत तापमान 1991-2020 के औसत से 3.05 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज हुआ है. यह आधुनिक रिकॉर्ड में अब तक का सबसे ऊंचा दैनिक तापमान बताया जा रहा है. इससे पहले नवंबर 2015 में करीब 3.02°C की वृद्धि दर्ज हुई थी, जबकि इस बार सितंबर में ही यह स्तर पार हो गया है.
वैज्ञानिकों के मुताबिक अल-नीनो अभी मजबूत हो रहा है और दिसंबर तक चरम पर पहुंच सकता है. यह प्राकृतिक जलवायु घटना पूर्वी-मध्य प्रशांत के पानी के सामान्य से अधिक गर्म होने और हवाओं में बदलाव से जुड़ी है. गर्म समुद्री पानी वाष्पीकरण बढ़ाकर वैश्विक मौसम को प्रभावित करता है. इस बार इसकी शुरुआत करीब नौ महीने पहले पश्चिमी प्रशांत में हवाओं में बदलाव से हुई थी.
4°C तक पहुंच सकता है तापमान?
निनो 3.4 क्षेत्र में समुद्री तापमान के आधार पर अल-नीनो की तीव्रता मापी जाती है. 3.05°C का दैनिक रिकॉर्ड 1982, 1997 और 2015 की मजबूत घटनाओं से भी ऊपर है. कुछ आंकड़ों में इसकी तुलना 1877 की ऐतिहासिक घटना से की जा रही है, जिसे बड़े सूखे और अकाल से जोड़ा जाता है. मॉडल संकेत देते हैं कि मासिक औसत और बढ़ सकता है और कुछ अनुमानों में चरम तापमान करीब 4°C तक पहुंचने की संभावना है, हालांकि यह अभी अनिश्चित है.
दुनिया के मौसम पर असर
अल-नीनो और जलवायु परिवर्तन का संयुक्त प्रभाव चिंता बढ़ा रहा है. अमेरिका में उत्तरी हिस्सों में सामान्य से अधिक गर्मी और पश्चिम-मध्य क्षेत्रों में ज्यादा बर्फबारी संभव है. पेरू-चिली में भारी बारिश और बाढ़ देखी जा रही है. मध्य अमेरिका व कैरेबियन में सूखा फसलों को प्रभावित कर सकता है.
एशिया में भारत समेत कई देशों में कमजोर मॉनसून, इंडोनेशिया में जंगल की आग और धुआं तथा ऑस्ट्रेलिया में बढ़ता सूखा संभावित प्रभाव हैं. अफ्रीका के कुछ हिस्सों में भी बारिश का पैटर्न बदल सकता है. कुल मिलाकर बाढ़, सूखा, लू और तूफानों का जोखिम बढ़ सकता है.
निगरानी और तैयारी जरूरी
मौसम एजेंसियां रोजाना आंकड़ों पर नजर रख रही हैं क्योंकि दैनिक तापमान में उतार-चढ़ाव संभव है. राष्ट्रीय मौसम सेवाएं किसानों, आपदा प्रबंधन टीमों और लोगों को अलर्ट जारी कर रही हैं. पानी बचाने, फसल योजना बदलने और आपात तैयारी पर जोर दिया जा रहा है. ऊर्जा, खाद्य सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव बढ़ सकता है. वैज्ञानिक आगे के डेटा का इंतजार कर रहे हैं और प्रभावित क्षेत्रों के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
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