Germany Nuclear Fusion: जर्मनी धरती पर सूरज जैसी ऊर्जा पैदा करने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है। वैज्ञानिक और निजी कंपनियां न्यूक्लियर फ्यूजन तकनीक पर शोध कर रही हैं, जिसमें हल्के परमाणुओं को मिलाकर भारी मात्रा में ऊर्जा पैदा की जाती है। Proxima Fusion मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट फॉर प्लाज्मा फिजिक्स के साथ मिलकर स्टेलरेटर तकनीक विकसित कर रही है।
फ्यूजन वही प्रक्रिया है जिससे सूरज में ऊर्जा बनती है। वहां अत्यधिक तापमान और दबाव में हाइड्रोजन परमाणु आपस में जुड़ते हैं। धरती पर चुनौती यह है कि प्लाज्मा को करोड़ों डिग्री तक गर्म करके नियंत्रित रखा जाए। स्टेलरेटर में शक्तिशाली चुंबकीय कॉइल गर्म प्लाज्मा को मशीन की दीवारों से दूर रखते हैं।
वेंडेलस्टीन 7-X ने दिखाया रास्ता
जर्मनी की वेंडेलस्टीन 7-X मशीन इसी तकनीक पर काम कर रही है। 2025 में इसमें प्लाज्मा का तापमान करीब 3 करोड़ डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा और एक प्रयोग में प्लाज्मा 43 सेकंड तक कायम रहा।
अल्फा के बाद स्टेलारिस की तैयारी
प्रॉक्सिमा फ्यूजन का पहला बड़ा लक्ष्य अल्फा मशीन है, जिसे म्यूनिख के पास गार्चिंग में बनाने की योजना है। करीब 2 अरब यूरो की लागत वाले इस प्रोजेक्ट में यह जांचा जाएगा कि फ्यूजन में लगाई गई ऊर्जा से अधिक ऊर्जा हासिल हो सकती है या नहीं। इसके बाद कंपनी बवेरिया के गुंड्रेमिंगेन में पहले से मौजूद न्यूक्लियर पावर प्लांट की साइट पर स्टेलारिस फ्यूजन पावर प्लांट बनाने की योजना पर काम कर रही है। लक्ष्य फ्यूजन से बिजली बनाकर ग्रिड तक पहुंचाना है, हालांकि परियोजना अभी शुरुआती चरण में है।
रिसर्च पर 2.4 अरब यूरो का निवेश
जर्मन सरकार मौजूदा कार्यकाल में फ्यूजन रिसर्च और संबंधित कार्यों पर करीब 2.4 अरब यूरो खर्च करने की योजना बना रही है। हालांकि लगातार प्लाज्मा नियंत्रण, मशीन को अत्यधिक गर्मी से बचाना और फ्यूजन ऊर्जा को बिजली में बदलना अभी बड़ी चुनौतियां हैं। इन्हें हल होने पर फ्यूजन भविष्य में बड़े पैमाने पर कम-कार्बन बिजली का स्रोत बन सकता है।
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