Iran US War Indian Ocean: ईरान और अमेरिका के बीच बढ़े तनाव के बीच ईरान के सुप्रीम लीडर के वरिष्ठ सलाहकार याह्या रहीम सफावी ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ने फिर हमला किया तो संघर्ष का दायरा हिंद महासागर और उससे आगे तक बढ़ सकता है। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी Fars द्वारा जारी वीडियो में सफावी ने कहा कि संघर्ष पहले ही फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य से लाल सागर तक फैल चुका है।
समुद्री मार्गों पर बढ़ा दबाव
तेहरान और वॉशिंगटन के बीच फारस की खाड़ी, ओमान की खाड़ी और प्रमुख समुद्री व्यापार मार्गों को लेकर तनाव जारी है। ईरानी अधिकारियों ने अमेरिका की किसी नई सैन्य कार्रवाई की स्थिति में क्षेत्र में अमेरिकी हितों और ठिकानों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने भी कहा है कि आगे उकसावे की स्थिति में वह अपनी रणनीति और लक्ष्यों में बदलाव कर सकता है।
हिंद महासागर करीब 7.05 करोड़ वर्ग किमी में फैला दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा महासागर है। लाल सागर को अदन की खाड़ी और आगे हिंद महासागर से जोड़ने वाला बाब-अल-मंदेब भी अहम समुद्री मार्ग है। वहीं होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ता है।
भारत पर क्या होगा असर?
रॉयटर्स के मुताबिक, सप्ताहांत में होर्मुज से केवल 17 कमोडिटी जहाज गुजरे, जबकि पिछले सप्ताह यह संख्या 37 और युद्ध से पहले औसतन करीब 125 प्रतिदिन थी। बाब-अल-मंदेब से आवाजाही भी घटी है।
हिंद महासागर तक संघर्ष फैलने पर एशिया की ऊर्जा और व्यापार आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। भारत पहले ही ऊंचे तेल, LPG और शिपिंग खर्च का सामना कर रहा है। भारत अपनी जरूरत का 88% से अधिक कच्चा तेल आयात करता है। सितंबर में ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल पार कर गया, जबकि भारत के क्रूड बास्केट का औसत मूल्य जुलाई के 82.04 डॉलर और अगस्त के 90.19 डॉलर के मुकाबले बढ़कर सितंबर में 102.11 डॉलर प्रति बैरल हो गया।
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