Mulla Afroz NSA Case: संभल हिंसा मामले में आरोपी मुल्ला अफरोज को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को अफरोज के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत जारी निवारक हिरासत आदेश को रद्द कर दिया। अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार पर 10 लाख रुपये की लागत भी लगाई। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने मामले की सुनवाई की। सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस फैसले को भी दरकिनार कर दिया, जिसमें अफरोज की NSA के तहत हिरासत को बरकरार रखा गया था। अदालत ने कहा कि कथित स्वीकारोक्ति को अकेले निवारक हिरासत का आधार नहीं बनाया जा सकता।
फैसले के बाद परिवार हुआ भावुक
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मुल्ला अफरोज के परिवार ने खुशी जाहिर की। परिवार ने फैसले को निष्पक्ष बताते हुए अदालत का धन्यवाद किया। परिवार के मुताबिक, पिछले करीब 19-20 महीनों के दौरान उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा और उन्हें लगातार अदालत के चक्कर लगाने पड़े। अफरोज के भाई मेहरोज ने कहा कि उन्हें इतने अच्छे फैसले की उम्मीद नहीं थी। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसले की सराहना करते हुए कहा कि आखिरकार उनके भाई को इंसाफ मिला।
19 महीने जेल में रहने का दावा
मेहरोज के मुताबिक, मुल्ला अफरोज ने करीब 19 महीने जेल में बिताए हैं। उन्होंने बताया कि जब परिवार ने अफरोज से बात की थी तो उसने खुद को निर्दोष बताया था। परिवार ने कहा कि उन्हें शुरुआत से ही न्यायपालिका पर भरोसा था और विश्वास था कि अदालत से उन्हें राहत जरूर मिलेगी। मेहरोज ने फैसले के लिए जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू का भी धन्यवाद किया।
गिरफ्तारी के दिन को लेकर परिवार ने क्या कहा
मेहरोज ने बताया कि जिस दिन मुल्ला अफरोज को गिरफ्तार किया गया, उस समय वह मौके पर मौजूद नहीं थे। उन्हें फोन करके बुलाया गया। जब वह वहां पहुंचे तो लोगों ने बताया कि चार लोग अफरोज को अपने साथ लेकर गए हैं। परिवार के मुताबिक, जब 24 घंटे बाद भी अफरोज वापस नहीं आए तो उन्होंने मानवाधिकार आयोग और मुख्यमंत्री से शिकायत की। इसके अलावा 112 नंबर पर भी सूचना दी गई।
परिवार ने लगाए साजिश के आरोप
अफरोज के भाई शहरोज ने भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि पिछले 19-20 महीनों में परिवार को कई परेशानियों का सामना करना पड़ा। परिवार का आरोप है कि मुल्ला अफरोज को जानबूझकर पूरी योजना और साजिश के तहत मामले में फंसाया गया। हालांकि, ये परिवार की ओर से लगाए गए आरोप हैं।
कोर्ट ने स्वीकारोक्ति को लेकर क्या कहा
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि किसी आरोपी की कथित स्वीकारोक्ति अकेले निवारक हिरासत का आधार नहीं बन सकती। अदालत ने पाया कि हिरासत का आदेश जारी करते समय संबंधित प्राधिकरण ने जरूरी सामग्री पर उचित तरीके से विचार नहीं किया था। इसी आधार पर NSA के तहत जारी आदेश को रद्द किया गया और उत्तर प्रदेश सरकार पर 10 लाख रुपये की लागत लगाई गई। यह फैसला मुल्ला अफरोज की NSA के तहत निवारक हिरासत से संबंधित है। उनके खिलाफ मामले में लगे अन्य आरोपों और संबंधित आपराधिक कार्यवाही का फैसला इस आदेश से अलग कानूनी प्रक्रिया का विषय है।
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