UPI MDR GST: नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने UPI लेनदेन पर Merchant Discount Rate (MDR) को लेकर GST संबंधी चिंताओं पर सफाई दी है। NPCI ने उन रिपोर्टों को गलत बताया है, जिनमें कहा गया था कि MDR पर GST से छोटे कारोबारियों के लिए डिजिटल पेमेंट महंगा हो जाएगा। संस्था के मुताबिक इसका असर मुख्य रूप से 2,000 रुपये से अधिक के कुछ व्यापारी भुगतानों पर होगा।
UPI की पूरी रकम पर नहीं लगेगा GST
15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से अधिक के P2M लेनदेन पर 0.4% MDR लागू होगा, जिसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये होगी। रेलवे, टेलीकॉम, बीमा और ईंधन जैसी श्रेणियों में 2,000 रुपये से अधिक के लेनदेन पर 5 रुपये का रियायती MDR रहेगा। MDR भुगतान प्रोसेसिंग और निपटान सेवा का शुल्क है। इस पर 18% GST लगेगा, UPI भुगतान की पूरी रकम पर नहीं। उदाहरण के लिए, 10,000 रुपये के भुगतान पर 0.4% MDR यानी 40 रुपये होगा और GST इसी 40 रुपये के सेवा शुल्क पर लगेगा।
96% से ज्यादा UPI लेनदेन MDR से बाहर
NPCI के अनुसार, 2,000 रुपये तक के लेनदेन पर MDR शून्य रहेगा और उस पर GST भी नहीं लगेगा। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक UPI मर्चेंट लेनदेन की कुल मात्रा में 96% से अधिक इसी श्रेणी में आते हैं। UPI से हर महीने 1 लाख रुपये तक की आय पाने वाले व्यापारियों को भी MDR नहीं देना होगा। हालांकि, 2,000 रुपये से अधिक के P2M लेनदेन की हिस्सेदारी FY23 के 15.1% से बढ़कर FY27 की जून तिमाही में 20.1% हो गई।
GST रजिस्टर्ड व्यापारियों को ITC का लाभ
टैक्स विशेषज्ञों के मुताबिक, GST रजिस्टर्ड व्यापारी MDR पर चुकाए गए GST का Input Tax Credit (ITC) लेकर उसे अपनी आउटपुट GST देनदारी के विरुद्ध समायोजित कर सकते हैं। हालांकि, टैक्स-फ्री वस्तुओं या सेवाओं का कारोबार करने वाले व्यवसायों को यह लाभ नहीं मिलेगा।
सालाना 5,184 करोड़ रुपये तक कलेक्शन का अनुमान
टैक्स विशेषज्ञों के एक अनुमान के अनुसार, MDR पर GST से सालाना करीब 5,184 करोड़ रुपये तक कलेक्शन हो सकता है। वास्तविक राजस्व डिस्काउंट, रियायती MDR दर, लेनदेन सीमा और पात्र व्यापारियों द्वारा लिए गए ITC पर निर्भर करेगा। NPCI ने कहा कि अधिकांश UPI लेनदेन और छोटे व्यापारी प्रभावित नहीं होंगे।
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