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‘UPI टैक्स वापस लीजिए मोदी जी’, ट्रंप का जिक्र कर राहुल गांधी ने PM मोदी को घेरा

by | Sep 16, 2026 | News Big

Rahul Gandhi UPI Tax: यूपीआई भुगतान पर प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर राजनीति तेज हो गई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार से इस प्रस्तावित शुल्क को वापस लेने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के इस फैसले से आम लोगों और कारोबारियों पर अप्रत्यक्ष रूप से बोझ बढ़ सकता है। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अमेरिकी दबाव के आगे झुक रही है। हालांकि, ये राहुल गांधी के राजनीतिक आरोप हैं और सरकार की ओर से इन आरोपों पर जवाब इस खबर में उपलब्ध नहीं है।

क्या है UPI शुल्क का मामला

प्रस्तावित व्यवस्था के तहत 15 अक्टूबर से ₹2,000 से अधिक के कुछ मर्चेंट यूपीआई लेन-देन पर 0.4 प्रतिशत MDR लगाए जाने की बात कही गई है। यह शुल्क सीधे ग्राहक से वसूलने के बजाय संबंधित व्यापारी या कंपनी पर लागू होने की बात कही गई है। राहुल गांधी ने इसी व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि भले ही शुल्क सीधे ग्राहक से न लिया जाए, लेकिन कारोबारी अपनी लागत कीमतों में शामिल कर सकते हैं। उनके मुताबिक इसका अंतिम असर उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है।

राहुल गांधी ने क्या कहा

राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी से इस प्रस्तावित शुल्क को वापस लेने की अपील की। उन्होंने अपने बयान में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का उदाहरण देते हुए मोदी सरकार की नीतियों पर राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने UPI पर शुल्क लगाने का रास्ता खोलकर अमेरिकी भुगतान कंपनियों को फायदा पहुंचाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। कांग्रेस पहले भी UPI पर MDR लागू किए जाने की किसी भी कोशिश का विरोध करती रही है।

कितने UPI लेन-देन प्रभावित होंगे

राहुल गांधी ने दावा किया है कि ₹2,000 से अधिक के मर्चेंट यूपीआई लेन-देन संख्या के लिहाज से सीमित हैं, लेकिन इनका कुल लेन-देन मूल्य में हिस्सा काफी बड़ा है। इसी आधार पर उन्होंने प्रस्तावित शुल्क के संभावित आर्थिक असर को लेकर सवाल उठाए हैं। फिलहाल इस मुद्दे पर मुख्य विवाद यही है कि मर्चेंट पर लगने वाले MDR का वास्तविक आर्थिक भार आखिरकार किस पर पड़ेगा। इसका असर व्यापारियों, डिजिटल भुगतान कंपनियों और उपभोक्ताओं पर किस स्तर तक होगा, यह शुल्क की अंतिम व्यवस्था और उसके क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा।

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