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यूपीआई पर MDR को लेकर केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने तोड़ी चुप्पी, कहा- न टैक्स है न सेस

by | Sep 22, 2026 | Breaking, News Top, देश

UPI MDR Nirmala Sitharaman: 2 हजार रुपए से ज्यादा के UPI पेमेंट पर MDR लगाने की चर्चा के बीच वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पहली बार इस मुद्दे पर सफाई दी है। उन्होंने कहा कि MDR का बोझ आम UPI यूजर्स पर नहीं डाला जाएगा। वित्त मंत्री के मुताबिक, MDR न टैक्स है और न ही सेस, बल्कि पेमेंट सिस्टम से जुड़े बैंकों और सेवा प्रदाताओं के बीच बांटी जाने वाली रकम है। उन्होंने इस मुद्दे पर विपक्ष पर भ्रम फैलाने का आरोप भी लगाया।

₹2,000 तक के UPI पेमेंट पर MDR नहीं

नए UPI फ्रेमवर्क के तहत ₹2,000 तक के P2M यानी व्यक्ति से व्यापारी को किए जाने वाले लेन-देन पर MDR नहीं लगेगा। वहीं, P2P यानी व्यक्ति से व्यक्ति को किया जाने वाला किसी भी राशि का UPI पेमेंट मुफ्त रहेगा। सरकार के मुताबिक, करीब 96 फीसदी P2M ट्रांजैक्शन भी इससे प्रभावित नहीं होंगे। ₹2,000 से अधिक के तय व्यापारी लेन-देन पर 0.4 फीसदी MDR लागू होगा। इसके अलावा ₹75,000 या उससे अधिक के लेन-देन पर MDR की अधिकतम सीमा ₹300 प्रति ट्रांजैक्शन रखी गई है।

ग्राहकों से नहीं लिया जाएगा MDR

निर्मला सीतारमण ने कहा कि MDR पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स के बीच लिया जाने वाला चार्ज है। इसका मकसद पेमेंट सिस्टम को बेहतर बनाना और UPI इकोसिस्टम के संचालन व विस्तार को बनाए रखना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसका भुगतान ग्राहकों से नहीं लिया जाएगा। वित्त मंत्री ने कहा कि संसद सत्र के दौरान भी वह इस मुद्दे पर स्पष्टीकरण दे चुकी हैं। उनके मुताबिक, इसके बावजूद विपक्ष की ओर से MDR को लेकर गलत धारणा फैलाई जा रही है और लोगों को भ्रमित किया जा रहा है।

वसूले गए चार्ज इन्हें मिलेगा

सरकार के मुताबिक, MDR से मिलने वाली राशि बैंकों, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स और UPI ऐप प्रोवाइडर्स के बीच बांटी जाएगी। यह रकम सरकार या NPCI के पास टैक्स के तौर पर जमा नहीं होगी। पात्र छोटे व्यापारियों को हर महीने ₹1 लाख तक के UPI QR भुगतान पर शून्य MDR की सुविधा जारी रहेगी। निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया कि MDR का बोझ ग्राहकों पर नहीं डाला जाएगा और ₹2,000 से कम के ट्रांजैक्शन पर यह लागू नहीं होगा।

जरूरी सेवाओं पर ₹5 शुल्क है

रेलवे, टेलीकॉम, इंश्योरेंस, ईंधन और खेती के कच्चे माल जैसे कम मार्जिन वाले क्षेत्रों में ₹2,000 से ज्यादा के हर लेनदेन पर ₹5 का तय शुल्क लगेगा। सरकारी यूटिलिटी बिल, स्कूल फीस और यूनिवर्सिटी भुगतान पर भी यही व्यवस्था लागू होगी, जबकि ₹2,000 तक के भुगतान इससे मुक्त रहेंगे। म्यूचुअल फंड, सिक्योरिटीज और शेयर ब्रोकर के जरिए भुगतान पर 0.02% MDR लगेगा, जिसकी अधिकतम सीमा ₹300 होगी। UPI ऐप्स को छिपे चार्ज लगाने की अनुमति नहीं होगी और बैंकों को ग्राहकों पर शुल्क का बोझ न डालने के लिए कहा गया है।

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