Friday, Sep 25

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योगी कैबिनेट के 23 बड़े फैसले…अग्निवीरों को 20% आरक्षण, किसानों को सस्ता लोन

Yogi Cabinet Decisions 2026: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में 23 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इनमें चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे के संशोधित प्रोजेक्ट, उत्तर प्रदेश खिलौना विनिर्माण प्रोत्साहन नीति-2025 और परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों को स्मार्ट स्कूल बनाने का प्रस्ताव शामिल है। पीआरडी स्वयंसेवकों और उनके आश्रितों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा भी मिलेगी।

मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना के तहत लघु एवं सीमांत किसानों को उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक से 6 लाख रुपये तक का दीर्घकालिक ऋण 6% सालाना ब्याज पर देने का फैसला हुआ है।

किरायेदारी शुल्क हुआ आसान

सालाना 10 लाख रुपये तक के किराए वाली 10 साल तक की किरायेदारी/पट्टा व्यवस्था में स्टांप शुल्क और रजिस्ट्रेशन फीस को सरल व किफायती किया गया है। अब ₹2 लाख तक सालाना किराए पर ₹1,000, ₹6 लाख तक ₹3,000 और ₹10 लाख तक ₹4,500 वार्षिक शुल्क होगा। पहले स्टांप शुल्क की गणना सर्किल रेट के आधार पर होती थी, जिससे अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ता था।

पूर्व अग्निवीरों को 20% आरक्षण

जेल वार्डर और परिवहन विभाग के प्रवर्तन सिपाही की सीधी भर्ती में पूर्व अग्निवीरों को 20% क्षैतिज आरक्षण मिलेगा। उन्हें अधिकतम आयु सीमा में 3 साल की छूट भी दी जाएगी। चार साल की सैन्य सेवा अवधि को आयु गणना से घटाने का प्रावधान है। आरक्षण का लाभ उनकी संबंधित सामाजिक श्रेणी में समायोजित किया जाएगा। सरकार के मुताबिक सैन्य प्रशिक्षण, अनुशासन और सुरक्षा अनुभव जेलों की सुरक्षा मजबूत करने में उपयोगी होगा।

हर जिले में खुल सकेंगे 3 ATS

कैबिनेट ने स्वचालित परीक्षण स्टेशन (ATS) के लिए राज्य नीति-2026 को मंजूरी दी है और 2 अगस्त 2023 की पुरानी नीति खत्म कर दी है। हर जिले में अधिकतम 3 ATS सेंटर खोले जा सकेंगे और प्रत्येक में सालाना 24 हजार वाहनों तक की जांच होगी। सेंटर के लिए जमीन की न्यूनतम सीमा 2.5 एकड़ से घटाकर 1 एकड़ और ₹6 करोड़ की नेटवर्थ की अनिवार्यता खत्म कर दी गई है। संचालन शुरू करने के लिए 6 महीने की छूट भी मिलेगी।

यह नीति केंद्र की 2021, 2022 और 2024 की अधिसूचनाओं के अनुरूप तैयार की गई है और अधिसूचना जारी होते ही लागू होगी। इससे सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा। निजी निवेश और तकनीकी-गैर-तकनीकी रोजगार बढ़ेंगे। मशीनों से बिना मानवीय हस्तक्षेप फिटनेस जांच होने से पारदर्शिता बढ़ेगी और सड़कों पर अनफिट वाहनों की संख्या घटने से दुर्घटनाओं में कमी आने की उम्मीद है।

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